साहित्य
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पुण्य ख़त्म तो राजा रंक होता है
मकान कितना भी साफ़ सुथरा हो, धूल गर्दा तो अंदर आ ही जाती है, हम कितने भी समझदार क्यों न…
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मन दर्पण
कैसा है ये मन का दर्पण, पता नहीं क्या कहता रहता खुली क़िताब क़लम को लेकर,सपने सदा लिखता ही…
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मेरा अस्तित्व (एक नई उड़ान)
अब रुकने का नाम नहीं प्रिय, दुनिया की परवाह छोड़ दी, लक्ष्य भेदना है अब मुझको, सफलता से नाता…
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मौन का संगीत
शहरों की अंधी दौड़ से जब थककर चूर होते हैं, तब इन अडिग पहाड़ों के हम थोड़े करीब होते हैं।…
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हमसफर
हाथ में हाथ लिए जब चलते हैं दो लोग, रास्ते खुद-ब-खुद मंज़िल बन जाते हैं। सिर्फ *जवानी* ही नहीं महकती…
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देश की धरोहर
देश धरोहर मानिए, संस्कृति का श्रृंगार। पीढ़ी से पीढ़ी चले, इसका दिव्य प्रसार॥ मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वरा, गूँजे प्रेम संदेश।…
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परिवार
जिस परिवार में हमने अपने, सारे सुख-दुख बाँटे हैं, खाते मिलकर भोग-मिठाई, और सभी फल बाँटे हैं। दिल का सूना…
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रातें गुजार दी
जिंदगी भी, अजीब अजीब दी है उस ऊपर वाले ने , मुझे याद नहीं होश में आने के बाद अर्थात…
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ये वो कहानी है जो मैं कभी कह ना पाया
रखा है माँ की गोद में सर पर बाप को कभी सीने से लगा नहीं पाया …!! बाप अपने…
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यही तो है जिन्दगी
कुछ दबी हुई ख्वाहिशें है, कुछ मंद मुस्कुराहटें, कुछ खोए हुए सपने है, कुछ अनसुनी आहटें.. कुछ सुकून भरी…
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