साहित्य

आधार छंद- जनहरण घनाक्षरी

जलधर नभ पर,
गरज मचल कर,
लपट झपट तुम,
हरदम चलना।
गगन कड़क कर,
तनिक लरज कर,
तड़ित चपल भय,
उर मत पलना।।
चमक दमक कर,
सिहरन तन भर,
हरषित मन कर,
मत मनु छलना।
सहज सरल मन,
कर सुरभित तन,
जलद बरस कर,
नद पथ गलना।।

डॉ ऋतु अग्रवाल
मेरठ, उत्तर प्रदेश

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