साहित्य

अरावली बचाओ, जीवन बचाओ

सुनील कुमार महला

महान् प्रकृति कवि विलियम वर्ड्सवर्थ ने कहा है कि -‘नेचर डिड नेवर बिट्रे, द हर्ट दैट लवड हर’ मतलब यह है कि ‘प्रकृति कभी उनसे विश्वासघात नहीं करती जो उसे प्यार करते हैं।’ मनुष्य के लालच और स्वार्थ की कोई सीमा नहीं है और आज मनुष्य अपने चूल्हे के नीचे आंच सरकाने से मतलब रखता है और विकास के नाम पर प्रकृति और पर्यावरण का अंधाधुंध शोषण कर रहा है। अरावली से जल पुनर्भरण संभव हो रहा है, रेगिस्तान पर अंकुश लगा हुआ है, यह बारिश में सहायक है तथा जैव-विविधता का घर है। जब अरावली नहीं रहेगी, तो मनुष्य, जीव-जंतुओं और वनस्पतियों का अस्तित्व कहां संभव है। अरावली को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए और मनुष्य को यह चाहिए कि वे उसके संरक्षण के लिए आगे आएं। कुछ पंक्तियां समर्पित हैं-‘अरावली बचाओ, जीवन बचाओ’ पर-

हे मनुष्य,
कब भूल गए तुम
कि मिट्टी की धड़कन
तुम्हारी सांसों से जुड़ी है?

अपनी क्षणिक खुशियों के बदले
तुमने सदियों का संतुलन बेच दिया,
मेरे रिसते आंसू
भविष्य की प्यास लिख रहे हैं।

क्या तुम्हारी संस्कृति की वे कथाएँ
अब केवल ग्रंथों में कैद हैं,
जहाँ पर्वत पिता थे,
नदियाँ मां और वन
जीवन के स्वप्न थे?

मैं प्रश्न नहीं,
तुम्हारे विवेक की पुकार हूं,
मैं पीड़ा नहीं,
आने वाले कल का संकेत हूं।

यदि आज तुम थाम लो मेरा हाथ,
तो हरियाली फिर मुस्कुराएगी,
नदियाँ गीत गाएँगी,
और धरती
फिर से भरोसे की सांस लेगी।

याद रखना,
मैं विनाश की कथा नहीं,
जीवन की ढाल हूं,
और तुम्हारा संरक्षण
ही मेरी सबसे सुंदर कविता है।
सुनील कुमार महला, न्यू हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, न्यू शिवसिंहपुरा, सीकर।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!