साहित्य

बदलता कैलेंडर

डॉ अनिता निधि

समय निर्वाध रूप से चलता रहता है,
कहता है वह तुमसे तुम भी चलते रहो।
जो बीत गया जीवन में, सो बीत गया,
उसको तुम कभी याद ना करते रहो।

दीवार पर टंगा कैलेंडर हर साल बदलता है,
बदलता कैलेंडर हमसे यह कहता है।
समय के साथ तुम्हें भी आगे बढ़ना है,
पीछे मुड़कर नहीं देखना यह कहता है।

बीते वर्ष को याद कर तुम दुखी मत होना
बीते वर्ष भूल कर तुम नव संचार करना
उड़ते वक्त को पकड़ स्मृतियों को मत खोना
नव वर्ष में तुम अपना हर सपना साकार करना।

यूं 31 दिसंबर और 1 जनवरी में कोई अंतर नहीं है,
कैलेंडर ही तो बदला है दिन, महीने को तुम आजमाना।
सब कुछ वैसा ही है, अंदर बाहर सब वही है,
करो 2026 का स्वागत और तुम खुशियों से झूम जाना।

बदलता कैलेंडर कहता हमसे तुम भी अब बदल जाओ
नव रूप लेकर नयी उम्मीदें और नये सपने तुम सजाओ
ठान लो तुम्हें जीवन की ऊंचाइयों को छू लेना है,
नव वर्ष में नए लक्ष्य, दिशा, नयी कहानी गढ़ जाओ।

डॉ अनिता निधि
जमशेदपुर, झारखंड

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