
डॉ अमित कुमार बिजनौरी
सुनो… सुनो… सुनो इतिहास सुनाता हूँ,
भारत के दो महामानवों की गाथा गाता हूँ।
एक अटल—विचारों की चट्टान समान,
दूजे मदन मोहन—ज्ञान के उज्ज्वल प्राण।
एक कवि-हृदय, दूजे विद्या का शिखर,
दोनों सत्पुरुष—जन-जन के पथप्रदर्शक अमर।
इन दो महामानवों को शीश झुकाता हूँ।
एक ने राष्ट्र को नीति की राह दिखाई,
दूजे ने शिक्षा से पीढ़ी गढ़ पाई।
भारत का मान दोनों ने विश्व बढ़ाया,
देश नहीं—सारी दुनिया ने सम्मान लुटाया।
गर्व से यह सच मैं दोहराता हूँ।
जब-जब उनकी वाणी ने स्वर पाया,
शब्दों में सत्य स्वयं उतर आया।
सीधे, सरल, न कोई दिखावा,
विचारों में था बस देश का भाव समावा।
शब्द-पुष्पों से नमन चढ़ाता हूँ।
मदन ने काशी को ज्ञान-धाम बनाया,
अटल ने गाँव को शहर से जोड़ पाया।
शिक्षा और विकास—दोनों की पहचान,
जन-जन के दिल में बसते ये महान।
लोकनायक कह इन्हें पुकारता हूँ।
आज की पीढ़ी से बस इतना कहता हूँ—
ऐसे चरित्रों को जीवन में धरता हूँ।
अटल सा संकल्प, मदन सा ज्ञान,
तभी बचेगा भारत, तभी बढ़ेगा मान।
इन्हीं शब्दों संग वाणी विराम लाता हूँ।
मौलिक स्वरचित
डॉ अमित कुमार बिजनौरी
कदराबाद खुर्द स्योहारा
जिला बिजनौर उत्तर प्रदेश




