साहित्य

गजल

डाॅ सुमन मेहरोत्रा

आज हर दिल में वतन से प्यार का मंतर नहीं,
देश की खातिर जिये उस वीर को है डर नहीं।

जोश सागर की तरह ही रख चलें जो राह पर,
आज उन जैसा बड़ा कोई वफा जलधर नहीं।

देश सरहद पर डटे हैं वीर हैं वे राम से,
धीर हैं गंभीर हैं सब सैन्यदल कायर नहीं।

संग माॅं का प्यार पावन दे रहा ताकत सदा,
देश से बढ़कर जगत में दूसरा है घर नहीं।

रक्त से सिंचित धरा की शान लिखते जा रहे,
वीर इन जैसा जगत में है सुमन सुकुॅंवर नहीं।

डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार

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