साहित्य

गज़ल

ममता झा मेधा

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खुशबू उड़कर आई है तेज फिजाओं में।
ये चांद बहुत भटका सावन कि घटाओं में।।

दिल को मिलता है तेरी सूरत से सुख ही।
माना जिसको हमने भगवान दुआओं में ।।

कुछ सर्द हवा भी थी कुछ ख्याल तुम्हारा था।
अब घोल जहर का है इन शुद्ध हवाओं में ।।

मौसम कहता है खुश सब लोग रहें जग में।
होता कुछ जहर मिला अंग्रेजि दवाओं में।।

अपना कर गैरों को छलना न कभी ममता।
मासूम मुहब्बत है फूलों कि खताओं में।।
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ममता झा मेधा
डालटेनगंज

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