
तेरा नाम ही जैसे भक्ति का गीत है,
राम-स्नेही — तेरी ममता अनमोल प्रीत है।
हर सुबह तेरे संग सूरज मुस्कुराता था,
पूजा की थाली में स्नेह झर जाता था।
तेरी हँसी में घर का संसार बसता था,
तेरी बातों में जीवन का सार मिलता था।
थक कर जब भी लौटे हम दुनिया से हार के,
तेरी गोद में मिलती थी राहत प्यार के।
हर रसोई में तेरे हाथों का स्वाद है अब भी,
तेरी दुआओं से ही सजे हैं ये सब दीपक जी।
हर दुख में तू कहती,“मत डर बेटा, मैं साथ हूँ,”
अब लगता है तू आकाश की हर ज्योति में साथ है।
तू न रही, पर तेरा आशीष हर पल बरसता है,
तेरे बिना भी ये मन तेरे संग हँसता है।
माँ, तेरी ममता की खुशबू सदा रहेगी बहार,
राम-स्नेही देवी जी — तू है, बस रूप है अब पार।
तेरी पूजा, तेरी हँसी, तेरी ममता की छाँव,
अब भी देती है मन को गहरा ठाँव।
हे माँ, तू जहाँ भी है, वहीं से देख रही होगी,
तेरे बेटे के जीवन में रोशनी भर रही होगी।
दिनेश पाल सिंह *दिलकश*




