
बच्चों,मूली है गोरी-गोरी
दिखती है प्यारी-प्यारी
रोज खूब नहाती-इतराती
खूब हंसकर नखरे करती
काले बैगन को चिढाती
मस्ती में मुँह खूब बनाती
मूली बैगन को काला कहती
मूली बैगन को भाव नहीं देती
बैगन ने जब आंख दिखायी
मूली शरमा कर भाग गयी
बैगन खिलखिलाकर हंसा
बच्चों मजा आ गया ढेर सा
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जयचन्द प्रजापति ‘जय’
प्रयागराज



