
नर्मदा माता नमन , तुमको हमेशा मेरा ।
आशीष सिर धार , प्यार पाया है तेरा ।।
अवतरित हो अमरकटंक , की मैं क्या महिमा कहूँ ।
शीश आपके अंक पावन , में माँ हमेशा मैं रहूँ ।।
आपके श्री चरन शरन में , मातृ माथ है मेरा ।………………१
परिक्रमा करते नर तेरी , मन वांछित फल पाते है ।
कर स्नान मग्न मन से नर , हर हर भोले गाते है ।।
कंकर कंकर शंकर , सब में है शम्भू बसेरा ।………………२
तेरी महिमा की गाथायें , नर गाते है सांझ सवेरे ।
चमत्कार देखे बहु तेरे , माँ करती दुख दूर निवेरे ।।
सबको भोजन धन भी देती यह विश्वास है मेरा ।…………३
पुत्री मेखलराज दुलारी , शिव शंकर की प्यारी ।
स्कंन्ध पुराण रेवाखण्ड , में महिमा अति भारी ।।
सोनभद्र युवराज को , अति मंगल मंत्र है मेरा ।……………..४
डा. राजेश तिवारी ‘मक्खन’
झांसी उ प्र




