
मानवता का दीप जले,
प्रभु ऐसा देना वरदान।
प्रेम भाव का हो उजियारा,
नित नित करता मैं गुणगान।।
प्रभु ऐसा देना वरदान। …
राग द्वेष की बहे न धारा,
हिंसा मुक्त हो जगत हमारा।
सारे जग में भारत अपना,
सदा बने यह सबसे प्यारा ।।
बने सदा ही यह देश महान।।
प्रभु ऐसा देना वरदान। …
हो न कोई अपराध कभी,
वाणी में हो पावनता।
ऊँच नीच की हो न भावना,
जग में फैले मानवता।।
एक दूजे का सब करें,
सदा सदा ही हम सम्मान।।
प्रभु ऐसा देना वरदान। ……
रचनाकार- भुवन बिष्ट
रानीखेत (उत्तराखण्ड)




