
पवन पावनी मलयज लोभे।
नमन मातु वंदन नित शोभे॥
सघन वीथिका मधुमय छाया।
मधुर नीर है पनघट भाया॥
तमस दूर सूरज शुभ द्वारे।
गरम रश्मियाँ सब पर वारे॥
चपल चाँदनी नभ नित शोभे।
कुटिल कथ्य जीवन भर चोभे॥
गगन गामिनी नभचर प्राणी।
नित नवीन चातक शुचि वाणी॥
मधुर कोकिला सुरभित बोले।
तितलियाँ सदा उपवन डोले॥
सुरुचिपूर्ण है मदन मुरारी।
नमन नित्य मोहन गिरधारी॥
जलज जीव जंगम शुचि सारे।
गगन मध्य शोभत सब तारे॥
© डॉ अर्जुन गुप्ता ‘गुंजन’
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
मो० 9452252582




