
शीत ऋतु
गर्मी की तपिश गई
सर्दी की ऋतु आई
ठंडा ठंडा मौसम लाई
भास्कर की तपिश को ठंडा कर दे
चारों तरफ़ धुंध है छाई
मौसम के संग उपवन में भी
नूतन रंगत है आई
खेतों में पीली सरसों भी
फूली है इठलाई है
एसी कूलर सब हो गए बंद
रातों की गति भी अब हो गई मंद
चादर कंबल रख दिए है सभी
निकाल ली है सभी ने रजाई
सुबह आंखों के खुलते ही
खिड़की से आती सूरज की किरणों की रौशनी में
अगर दर्शन हो जाय कान्हा का
जुबां पर जय श्री राधे कृष्णा
कानों में गूंजती चिड़ियों की चहचहाहट
मन को प्रफुल्लित कर देती है।।
डॉ. अनीता शाही सिंह
असिस्टेंट प्रोफेसर
प्रयागराज




