
गीत- हृदय हुआ हरिधाम
भूल गई मैं जग के बंधन, याद रहे घनश्याम।
प्रेम निभाया जब से मोहन, हृदय हुआ हरिधाम।।
राजमहल के मखमल तजकर, लिया जोगिनी वेश।
इकतारे की धुन पर गिरिधर, भेज दिया संदेश।।
प्रेम राह पर मुझको करती, यह दुनिया बदनाम।
भूल गई मैं जग के बंधन, याद रहे घनश्याम।।
मोर मुकुट नित केश सँवारे, अधर बाँसुरी गीत।
पीर हरो दर्शन दिखलाओ, सांची हो तब प्रीत।।
कंठ लगा लो भव तर जाऊँ, जीवन हो अभिराम।
भूल गई मैं जग के बंधन, याद रहे घनश्याम।।
विष प्याला देवान्न बना जब, भौंचक था संसार।
देह सहित स्वीकार किया प्रभु, मिला मुझे सुखसार।।
लोग कहें कान्हा की मीरा, मीरा के हैं श्याम।
भूल गई मैं जग के बंधन, याद रहे घनश्याम।।
डॉ ऋतु अग्रवाल
मेरठ, उत्तर प्रदेश




