
सुना है दिसंबर जा रहा है जनवरी से मिलने,
पुरानी यादों को नए ख्वाबों में ढालने।
सर्द हवाओं ने धीरे से कहा अलविदा,
उम्मीदों ने ओढ़ी फिर सुनहरी चादर नई-नई।
दिसंबर बोला—थक गया हूँ मैं चलकर,
अब तू संभाल ले सपनों का हर एक सफ़र।
मैंने आँसू, हँसी सबको सहेजा है,
तेरे नाम हर अधूरा किस्सा भेजा है।
जनवरी हँसकर बोली—आओ गले लग जाओ,
बीते पलों का बोझ अब यहीं छोड़ जाओ।
मैं सूरज की किरणें साथ लाऊँगी,
हर सूने आँगन में खुशियाँ सजाऊँगी।
दिसंबर ने दी ठंड सी मुस्कान,
जनवरी ने थामा विश्वास का हाथ।
यूँ साल का सफ़र फिर आगे बढ़ा,
हर दिल ने नए कल से रिश्ता गढ़ा।
कुलदीप सिंह रुहेला
जिला / सहारनपुर उत्तर प्रदेश




