साहित्य

मेरा कोई नववर्ष नही

धीरज कुमार शुक्ला'दर्श'

मेरा कोई नववर्ष नही
जीवन में कोई हर्ष नही
तेरा जब स्पर्श नही
मेरा कोई नववर्ष नही
दुःख है तो दुःख ही सही
अश्कों का स्पर्श सही
बढ़ा हुआ संघर्ष सही
मेरा कोई नववर्ष नही
बिन तेरे मंगल ही नही
दीपक में प्रभाती नही
सॉंसों में रवानी नही
मेरा कोई नववर्ष नही
प्रतीक्षा तो प्रतीक्षा ही सही
तन्हाई तो तन्हा ही सही
तुझसे अलग मैं तो नही
मेरा कोई नववर्ष नही
अनकही बाते हैं कहीं
तेरे बिन महका ही नही
जीवन कुसुम मेरा कहीं
मेरा कोई नववर्ष नही
साथ तेरे जब सब था सही
हर दिन मेरा नववर्ष वही
‘दर्श’ का अर्थ तू ही रही
बिन तेरे जब मैं ही नही
मेरा कोई नववर्ष नही
जीवन का कोई अर्थ नही
सब तू है मैं कुछ भी नही
संग तेरा सच्चा इश्क़ नही
मेरा कोई नववर्ष नही
जीवन में कोई हर्ष नही

कवि,लेखक, गीतकार,साहित्यकार:-
धीरज कुमार शुक्ला’दर्श’
ग्राम-पिपलाज,तहसील-खानपुर,
जिला-झालावाड़ ,राजस्थान (३२६०३८)

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