
तुलसी दल की महिमा इतनी, यह शीश सजे भगवान सदा ।
जब भी प्रभु को मैं भोग धरूँ, तुलसी धरती यह जान सदा ।।
जल अर्पण रोज करूँ इनको, नित माँग रही वरदान सदा ।
पहले मुख में तुलसी धरती, फिर बाद करूँ जलपान सदा ।।
प्रभु ठाकुर को प्रिय है तुलसी, उनके हृद की यह नूर सदा ।
तुलसी दल से मुख शुद्ध रहे, तुलसी गुण से भरपूर सदा ।।
नित पान करे तुलसी दल जो, सब रोग करे यह दूर सदा ।
इसकी महिमा नित गान करो, तब गर्व करे यह चूर सदा ।।
जब कार्तिक पावन मास लगे, तुलसी – तुलसी कर जाप सदा ।
नित पूजन रोज करो इनका, तन का मिटता तब ताप सदा ।।
इनको भजती हर नार तभी, कटते उसके फिर पाप सदा ।
वर मोक्ष प्रदान करे तुलसी, करना हरि कीर्तन आप सदा ।।
नीलम अग्रवाल “रत्न” बैंगलोर
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