साहित्य

वीर हनुमंता

नीलम अग्रवाल "रत्न"

राम प्रभु के भक्त हनुमंता ।
अंजनी पुत्र वीर बलवंता ।।
पवन पिता रवि मुँह में डारे ।
मुनि जनों के काज संवारे ।।

दुःख भंजन नाम है तेरा ।
आप ही संकट हरो मेरा ।।
कामना मेरी सुनो प्रभु जी ।
पूर्ण कर आस तुम प्रभु जी ।।

वज्र शोभे गदा साजे ।
दुष्ट हैं डर कर सभी भाजे ।।
भ्रात के तुम प्राण लाए थे ।
राम प्रभु तब हिय लगाए थे ।।

पार सागर आप करवाए ।
मातु सीता का पता लगाए ।।
आप लंका आग लगवाए ।
तब विभीषण राज दिलवाए ।।

याद अपनी शक्ति तुम कर लो ।
निज चरण में कामना धर लो ।।
देख तेरे लाल खड़े हैं सब ।
कामना पूरी करो प्रभु अब ।।

नीलम अग्रवाल “रत्न” बैंगलोर
🙏

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