
पांव मेरे हैं ज़मीन पर, अंतरिक्ष भी दूर नहीं
पल पल हो रही तरक्की, इसमें कोई शक नहीं।
बिना ड्राइवर के मेट्रो भर रही रफ्तार,
आज की सुविधाओं से जीवन बना आसान।
खेती-बाड़ी में भी हो रहा बदलाव,
कृषि यंत्र ऐसे आ गए।
किसान के मन को भा गए।
स्मार्ट खेती स्मार्ट किसान ,यही राष्ट्र की पहचान,
हर और अब यही नजारा है।
हमारा किसान , कर रहा विकास ,
कम लागत अधिक उपज लेकर
किसान चल रहा , अपने पथ पर।
बैठा नहीं वह कभी भी थक कर।
कमलेश मुदगल (नई दिल्ली)




