
लो आ गया चिरप्रतीक्षित 2026,
चलो करें स्वागत इस नवागत वर्ष का,
क्या-क्या अनजाना होगा इसमें।
बस सोच रही हूँ कैसा स्वर्णिम होगा कल?
जो आज से बेहतर ही होगा।
शस्य श्यामला धरा पर मेरी फसलों का संसार होगा।
वीर जवानो का मनोबल ऐसा, शत्रु पर बरबस भारी होगा।
जहाँ भारत का परचम न झूमेें,
ऐसा न कोई कोना होगा।
खुले नयन से देखूँ सपने, सच करने को उड़ती हूँ।
नहीं परिंदा ऐसा कोई जन्मा,
जो उड़ते भारत को पिछाड़ सके।
विश्व गुरु की गरिमा से मण्डित,
अब एक दिन मेरा भारत होगा,
दूर नहीं है वो पल बस आने वाला कल होगा।
मान, मर्यादा, धर्म पर चलकर,
सनातनियों का संबल होगा।।
सुषमा श्रीवास्तव , रूद्रपुर, ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड।




