
मुस्कान का दीप जलाओ आज,
मन के आँगन को सजाओ आज।
छोड़ो दुख की सारी परछाईं,
खुशियों का गीत सुनाओ आज।
नन्हीं सी हँसी में छुपा है जहाँ,
सपनों का एक प्यारा समाँ।
जो बाँटो तो बढ़ती जाती है,
ऐसी होती है खुशी की दास्ताँ।
रूठे मन को आज मनाओ,
अपनों को फिर गले लगाओ।
छोटी-छोटी बातों में ही,
जीवन का सुख ढूँढ पाओ।
ना धन से, ना शान से मिलती,
ये मिलती है सच्चे मान से।
दया, प्रेम और अपनापन से,
महक उठती है हर पहचान से।
चलो आज ये प्रण हम लें,
हर चेहरे पर हँसी सजाएँ।
दुनिया को थोड़ा बेहतर करके,
प्रसन्नता का दीप जलाएँ।
अतुल पाठक
हाथरस(उत्तर प्रदेश)




