साहित्य

बने राष्ट्र भाषा प्रभो

ईश्वर चन्द्र विद्यावाचस्पति

 

हिन्दी बोलें औ’ लिखें, करके उसे प्रणाम l
‘ईश्वर’ हिन्दी में करें, निशिदिन उत्तम काम ll

हिन्दी भाषा है भली, इसको दें नित मान l
हिन्दी में ही बोलकर, आप करें सम्मान ll

जैसा बोलें वह लिखें, उच्चारण के साथ l
‘ईश्वर’ इसके रूप पर, सभी झुकाते माथ ll

हिन्दी भाषा है सखे,सहज सरल सुपुनीत l
इसीलिए ‘ईश्वर’ इसे, सब देते हैं प्रीत ll

वैज्ञानिक भाषा भली,कहता यही विज्ञान l
इसीलिए ‘ईश्वर’ सदा, पाती है सम्मान ll

हिन्दी को अब विश्व में,मिला दूसरा स्थान l
बोलचाल को देखकर, सब करते सम्मान ll

रही राजभाषा अभी, अपने दम पर देख l
बने राष्ट्र भाषा प्रभो,तभी लिखूँ नव लेख ll

भारत से चलकर गयी, पहुँची अहा विदेश l
‘ईश्वर’दुनिया बोलकर,हरती साबका क्लेश ll

ईश्वर चन्द्र विद्यावाचस्पति,संत कबीर नगर (उत्तर प्रदेश)

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