साहित्य

हिंदुस्तान की माटी पर मोहब्बत कुर्बान…….

आकाश शर्मा आज़ाद

 

कहां थे अब तक तुम,,?
तुम्हें पता है,,
तुम्हें देखने के लिए,,
तुम्हारे बिना
कितना तड़पा हैं, ये दिल मेरा,,,
तुम्हें क्या पता,
मेरे पागल दिल ने,,
तुम्हें कितना याद किया
ऐ, महबूब मेरे,
तुम मिल जाओ मेरे,,
आशिक दिल को,,
मेरे दिल ने सिर्फ,,
तुम्हारे लिए पहली बार,,
हर मंदिर, हर गुरुद्वारे,,
हर दरगाह पर जाकर,,
प्रणाम किया !!,,
तुम्हें तो पता है, कि,,
कितना नास्तिक है ये,,दिल मेरा,,
मेरे दिल ने, सिर्फ तुम्हारे लिए,,
सिर्फ अपनी मोहब्बत के लिए,,
अपना नियम तोड़ा….
कुछ कहते क्यों नहीं तुम,,
ये,, क्या हुआ है तुम्हें,,
तुम इतने वर्षों बाद मिले हो,,
मुझसे,, फिर भी,,
इतने मौंन,इतने चुपचाप,
क्यों खड़े हो तुम,,
देखो तुम्हें मेरी कसम है,,
कुछ तो बोलो,,
क्या है तुम्हारे दिल के अंदर,,
अपने दिल के कपाट,,
तो,, खोलो तुम,,
सुनो मुझे डर लग रहा है,, अब,,
बताओ मुझे, तुम मेरे,,
महबूब हो या नहीं,,
सत्य कहा तुमने,,
मै,, तुम्हारा महबूब,,
तुम्हारी मोहब्बत नहीं हूं,,
बस तुम्हारी मोहब्बत,,
और मेरा नाता इतना है
कि मेरी शक्ल तुम्हारी
मोहब्बत से मिलती है,,
ये, और कुछ नहीं,,
मात्र एक कुदरत
का करिश्मा है,,
ठीक है, ये तो,,
अभी पता चल
जाएगा क्या सत्य है,,
क्या झूठ
जरा तुम मुझे,,
अपना हाथ दिखाओगे
वो, हाथ जहाँ,,
मेरे महबूब ने,,
मेरा नाम लिखवाया था,,
माफ, करना मुझे,,
सत्य कहा था तुमने,,
तुम मेरी मोहब्बत हो ही नहीं,,
क्योंकि मेरा महबूब मेरी मोहब्बत में,,
अपने लहू का कतरा -कतरा
बहा देता,, पर मेरा नाम,,
अपने हाथ से,,
कभी मिटता नहीं,,
देखो तुम मुझे यहां मिले हो अभी,,
मेरे जीवन में, तुम मुझे,
कभी आगे मिलना नहीं,,
मै तुम्हारी शक्ल को,,
अब आगे बर्दाश्त,
नहीं कर पाऊंगी,,
ऐ, खुदा मै, अपनी
मोहब्बत को कहा,,
तलाश करूं अभी
तू बता क्या मैं कभी
अपनी मोहब्बत से,,
मिल पाऊंगी,,या
नहीं,,(तुम)
तुम इधर भरे बाजार में,
मेरा पीछा क्यों कर रहे हो,,
मैंने कहा था ना तुमको,,
तुम मुझे नहीं मिलना आगे,,
तुम्हारी शक्ल मुझे
मेरी मोहब्बत की याद दिलाती है,,
मै,, नफरत करती हूं तुम्हारे
चेहरे से,,
जो तुम मुझे कह रही हो,,
यही बात मैं तुमको भी,
कह सकता हूं,,
कि तुम भरे बाजार में,,
मेरा पीछा क्यों कर
रही हो,,
देखो मुझे परेशान मत
करो तुम मेरा दिल
पहले से, बहुत जला हुआ है,,
अपना चेहरा दिखा कर,,
बार-बार मेरा दिल,
और ना जलाओ तुम,,
अब तुम जाओं अपने रास्ते,,
मै, अपने रास्ते जा रही हूं,,
ठहरो जरा एक क्षण
ये, तुम्हारे पास,,
मेरी तस्वीर क्या कर रही है,,
तुम तो कहते थे,
तुम तो मुझे जानते ही नहीं हो,,
जब हमारा कोई,,
संबंध ही नहीं है,,
तो, मेरी तस्वीर तुम्हारे पास
कैसे आई ?
और देखो जो भी,,
कहना सत्य कहना,,
इस बार,,
क्योंकि मुझे कभी,,
किसी और से पता चला,,
तुम्हारे दिल में,,
मेरे लिए छुपा है प्यार,,
तुम ही मेरी मोहब्बत हो,,
तो मै,, तुम्हारा
लहू पी जाऊंगी,,
इस बार,,
देखो मैं दिल में,,
कहीं ना कहीं,,
जानती हूं,,
कि तुम ही मेरा इश्क हो,,
मोहब्बत हो प्यार,,
पर मैं तुमसे,,
सुनना चाहती हूं,,
कि सत्य क्या है,,
मुझसे दूर रहने की,,
तुम्हारे दिल की,,
आखिर वजह क्या है ?
आज मैं तुमको, सत्य बताएं बिना
कहीं जाने दूंगी ही नहीं
तो, आखिरकार, दिल ने,,
दिल को पहचान ही लिया,,
तुम्हें सत्य बताने का वक्त,,
आज आ हीं गया,,
तो, ध्यान से सुनो
तुम आरंभ से सही कह रही थी,,
हाँ, मै, हीं तुम्हारी मोहब्बत हूँ
तुम्हारा इश्क हूं,तुम्हारी चाहत हूं,,
परंतु तुम मेरे बारे में,,
एक बात नहीं जानती हो,,
मैं तुमसे आज तक
राज़ की बात
छुपाई हैं
अपने दिल पर पत्थर रखकर,
किया है मैंने यह काम,,
अपने मुल्क की हिफाजत के लिए,,
मैंने अपने हाथों से,,
अपने दिल से,,
मिटा दिया तुम्हारा नाम
मैं,,अपने मुल्क का
एक वफादार सिपाही हूं,,
तुम मुझसे वादा करो,
देखो आखरी सांस तक
अपने दिल से बाहर,
नहीं निकलना यह बात
हवाओं को भी ना बताना
मेरी तुमसे इतनी है फरियाद,,
बस कुछ दिन और,,
हमारे नसीब में,,
जुदाई लिखी है,,
ये मैंने नहीं,,
खुदा ने,, हमारी कहानी लिखी है,,
अगर तुम्हारे अलावा,
अगर किसी को पता चली यह बात,,
तो मैं तुमसे अपने
सारे मोहब्बत के रिश्ते,
तोड़ दूंगा
ये, याद रखना तुम,,
कि मेरे लिए,
मेरी मातृभूमि से बड़ा
कुछ नहीं है,,
तुम पिक मत करो
तुम्हारा नाम क्या है
मुझे अब से कुछ याद नही हैं,,
मैं तुमसे यह वादा करती हूं,,
मैं इस मिट्टी में दफन भी हो जाओगी,
तब भी मेरी अस्थियों से,,
नहीं निकलेगी यह बात
पर एक बात मैं तुमसे कहना चाहूंगी आज,,
मुझे तुम पर फक्र है,,
मेरे दिल को भी अपने फैसले पर,,
आज हो रहा है नाज़
कि मेरे दिल में,,
तुम्हारे नाम का जिक्र हैं
हिंद की माटी पर,,
मेरे दिल की हजारों मोहब्बत कुर्बान,…..

आकाश शर्मा आज़ाद
आगरा उप्र

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