
भारत की नारी
हे! नारी भारत की, बदलो तुम अपने स्वभाव को।
चुप क्यों हो नारी? तुम्हें बदलना है इस संसार को।।
खड़ी क्यों हो मौन? अपने अंदर की शक्ति को तुम पहचानो।
अगर प्रेम करना ही है तो, माता सीता जैसी करो।।
भगवान राम के लिए जंगलों में, अपनी जान बिखेर दी।
जिसने हर वचन निभाने के लिए, सब कुछ न्यौछावर की।।
कोई परमात्मा भी जान न सके, तुम तो माता लक्ष्मी हो।
ये मत भूलो नारी, तुम आदिशक्ति की स्वरूप हो।।
आँचल भींगे आँसू से, सबका मान रखना।
आत्म सम्मान से, आत्म गौरव के लिए लड़ना।।
जिस जंजीर में बँधी तुम हो, उसे तोड़ना है तुमको।
हे! नारी बदलना है तुम्हें, हर मानव-मानव को।।
– अनुराग बघेल, कक्षा 7 वीं, शास. पूर्व माध्य. शाला बिजराकापा नवीन लोरमी मुंगेली, छत्तीसगढ़



