साहित्य

छत्तीसगढ़ के मुसवा

रामभरोस यादव

छत्तीसगढ़ के मुसवा ह कथे,
मोर फोकट-फोकट म बदनामी होगय।
मंय खाएंव नइ हंव धान, मोर नाम होगय।।
मोर फोकट-फोकट म बदनामी होगय।।
मंय पाएंव नहीं, कुछु खाएंव नहीं, मंय सोए रहेंव बिला म।
अतका बड़े धान घोटाला होगे, हमर जिला म।।
काखर मंय का बिगाड़ेंव, ले हे मोर नाम।
गाँव-गाँव अउ सहर-सहर म, करे हे बदनाम।‌।
हमन लइका पिचका धरे, खेत म जिथन सीला म।
मंय पाएंव नहीं, कुछु खाएंव नहीं, मंय सोए रहेंव बिला म।
अतका बड़े धान घोटाला होगे, हमर जिला म।।
सही बात के नइहे सुनइया, बतावंव मंय काला।
राइस मील अउ सुसाइटी म, करोड़ों के धान कागज म होगे घोटाला।।
दु किलो जादा घलो लेथे, लाए हच कहिके गीला म।
मंय पाएंव नहीं, कुछु खाएंव नहीं, मंय सोए रहेंव बिला म।
अतका बड़े धान घोटाला होगे, हमर जिला म।।
भस्टाचार ल लुकाए बर खोजथें बहाना।
कोनों मुसवा खाए बताथें, कोनों बताथें सुखाना।।
हमन इखर करनी देखत रहन, बईठे-बईठे किला म।
मंय पाएंव नहीं, कुछु खाएंव नहीं, मंय सोए रहेंव बिला म।
अतका बड़े धान घोटाला होगे, हमर जिला म।।

कवि- रामभरोस यादव
जमकोर मुगेली, छत्तीसगढ़

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