
धन्य धरा झाबुआ
आदिवासी पिछड़े अंचल
जो सैकड़ों कृतियों को
देश दुनिया को साहित्य जगत में
भेंट कर झाबुआ जैसे पिछड़े अंचल को सम्पूर्ण विश्व पटल पर दस्तक दे
अमर कर देने वाले
डॉ रामशंकर चंचल जिनकी
अनेक भाषाओं में अनुवाद हुई अमेज़न पर उपलब्ध कृति के साथ
डॉ पुलकिता सिंह आनंद द्वारा प्रकाशित कृति
आदिवासी जन जीवन
अंग्रेजी साहित्य में अमर चर्चित लघु कथाओं के साथ साथ विश्व पटल पर दस्तक देती अमेज़न पर उपलब्ध कृति में
इंकलाब पब्लिकेशन मुंबई द्वारा प्रकाशित कृतियों में विश्व चर्चित 14
कृतियां भेंट करने वाले
महान साहित्य साधक सादगी और सहज सरल इंसान
मानवीय सोच और चिंतन के लिए
देश दुनिया में चर्चित
एक महान व्यक्तिव को
सैकड़ों सम्मान से सम्मानित करते हुए देश और दुनिया के
लाखों चाहने वालों द्वारा
उन्हें अक्सर सम्मानित करते हुए
युवा पीढ़ी प्रतिभा धनी
सैकड़ों चाहने वाले
गर्व महसूस करते हुए
प्रेरित हो
आज सृजन के साथ साथ
जीवन सार्थक कर रहे हैं
धन्य धरा झाबुआ
धन्य धरा झाबुआ आदिवासी पिछड़े अंचल जहां जन्म हुआ डॉ रामशंकर चंचल आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है आदरणीय
सत् सत् प्रणाम करते है
सैकड़ों चाहने वालों का अथाह प्यार आशीष है यह सब कुछ
वंदन सत् सत् प्रणाम करता हूं
उन सभी मित्रों को युवा पीढ़ी को
ईश्वर कृपा बनी रहे
आनेवाला कल
देश दुनिया में
लाखों प्रतिभाओं से
सजा हुआ सम्पन्न हो
इन्हीं शुभ कामनाएं के साथ
डॉ रामशंकर चंचल, झाबुआ




