
सबका साथ सबका विकास का नारा होगया खोखा है
यूजीसी नव अधिनियम …… .धोखा है भाई धोखा है
कदम मिलाकर चलना होगा ..दांव पेंच से बचना होगा
समतामूलक समाज की रचनाभाई चारे से.करना होगा
सनद रहे जनतंत्र में मनमानी को जनमानस ने रोका है
महंगाई से मर रही जनता .. . फिर भी जिंदाबाद करी
तीन बार तिलक लगाकर दायित्वों का निर्वाह करी
नहीं कोई बैठना नदी बढ़ी है …. ..नैया हुई पुरानी है
बदल सफ़ीना होना पार . .नहीं तो खतम कहानी है
छेद नहीं है पेंदी में ……… …भारी बहुत झरोखा है
एक परिवार एक नौकरी ……. का सिधांत बनाना था
नई सोंच के अंतर्गत …..हर घर को लाभ पहुंचाना था
समतामूलक समाज की …स्थापना नहीं हो सकती है
चाँद बराबर दीपक होगा ….. यूजीसी नहीं लाना था
पूरा पूरा खोटा निकला…….जिसको समझे चोखा है
अगर कुछ गलत कहा हूं तो खूब हमको डांटिये
इंसान हूं साहब इंसान को. .. जातियों में न बांटिये
काटना है तो काट दीजिए ………. .. छुरी की धार से
बिन धार वाली तेग से……………. गरदन न काटिए
अधिकार है हथियार है …….मिला भी हुआ मोका है
देवेन्द्र सिंह गुड्डू नेता जी
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