
दिल करता है जिंदगी की कैनवास पर,
सपनों के रोज नए-नए चित्र बनाती रहूं।
आसमान में उड़ने के लिए उन्हें पंख दूं,
और हर पल उन्हें उड़ता हुआ देखती रहूं
दिल करता है चारों ओर हरियाली भर दूं,
वसुंधरा को एक दुल्हन सा सजाती रहूं।
पशु पक्षियों को मिले वृक्षों पर आसरा,
सबके लिए प्यारा सा जहां बनाती रहूं।
दिल करता है भूल कर सुख-दुख के मेले
हर बेसहारा को अपने गले से लगाती रहूं
भूखे को रोटी और प्यासे को पानी दूं,
नफरत के जहां में प्रेम गंगा बहाती रहूं।
दिल करता है जीवन डोर दे दूं अब,
कान्हा के हाथों में और मुरली सुनती रहूं
फूल बिछा दूं अब हर भक्तों की राह में,
राहों में पड़े कांटों को बस चुनती रहूं।
सौ, भावना मोहन विधानी
अमरावती महाराष्ट्र।




