
बन्द कर लो तुँ लाख दिल की दरवाजे
प्रीत की चाबी से एक दिन खुल जायेगा
मिलन की चाहत हो जब अगर दिल में
जग वाले भी मिलने से रोक ना पायेगा
चेहरा अपनी तुम हमें मत दिखलाना
ख्वाबों में तेरी अक्सर मैं आ ही जाऊँगा
मन की दर्पण में हमें मुस्कुराते ही पाओगे
मेरी हँसता अक्स तुम्हें वहाँ नजर आयेगा
प्यार किया है तुम से मैं चोरी नहीं की सनम
प्रीत रीत की है ये अपना रिस्ता जनम जनम
जब जब धरा पे हम दोनों ही आयेगें कभी
प्यार की रूत देखते तड़प उठेगै सभी
लिख दी है कोरे कागज पे तेरा ही नाम
ये इकरार हम प्यार में तुमसे करते हैं
वादा निभायेगै दिन रात मेरे दिल के हमदम
जीवन तुझपे निसार करके जग को दिखलायेगें
सजदा करेगी हमारी मोहब्बत को तब जमाना
प्रेम में जब हम दोनों जग से रूखसत हो जायेगें
घर घर चर्चा होगी हमारी प्रीत की अफसाना
जब हम प्यार में हद से गुजर कर दिखबायेंगें
उदय किशोर साह
मो० पो० जयपुर जिला बांका बिहार




