
जब तबाह हो जाएगी दुनिया मेरी,
तब गीत मेरे ही गाए जाएंगे।
जो शब्द मेरे अनसुने रह गए,
वो कल की धड़कन बन जाएंगे।
मैंने ख़ुद से भी, जो बातें छुपाईं,
वो सन्नाटों में बताए जाएंगे।
जो टूटन मेरे भीतर पलती रही,
वो सुर बनकर ही निभाए जाएंगे।
आज चुप्पी ने ओढ़ रखी है आवाज़,
कल ये मौन ही गुनगुनाए जाएंगे।
मैं मिट भी जाऊँ अगर वक़्त में,
मेरे एहसास तो रह जाएंगे।
जब तबाह हो जाएगी दुनिया मेरी,
तब गीत मेरे ही गाए जाएंगे।
दिनेश पाल सिंह ‘दिव्य’
जनपद संभल उत्तर प्रदेश




