
दोनो आँखों के साथ बग़ल में दोनों
कान नहीं होते तो चश्मा कहाँ लगाते,
बूढ़े होकर आखों की रोशनी कम हो
जाती तो कैसे दुनिया को देख पाते।
यह उस ईश्वर की ताक़त है,
मुँह, आँख, कान, नाक चारों,
पूरी सुंदरता के साथ बनायी हैं,
उसकी कृतियाँ सबको भायी हैं।
सच देखो, सच सुनो, सच बोलो,
और सदा इन सबकी ख़ुशियाँ लो,
सोच सकारात्मक ही रहे हमेशा,
सादा जीवन, सरलता अपना लो।
जिस तराजू से औरों को तौलते हैं,
उस पर बैठ कर ख़ुद को भी तौलो,
जीवन की सत्यता परख कर लो,
आदित्य इसको आसान बना लो।
विद्यावाचस्पति डा० कर्नल
आदिशंकर मिश्र, ‘आदित्य’
लखनऊ




