बेला में नववर्ष की, बने यही संजोग।
समता सबके उर रहे, धरती रहे निरोग।।
घर-घर में हो धर्म का, घट-घट में आभास।
सत्य सनातन का रहे, सबके हृदय उजास।।
स्वागत है नववर्ष का, करते हैं सत्कार।
शील क्षमा चित में धरे, आना तुम इस बार ।।
सुखमिला अग्रवाल भूमिजा
जयपुर




