
श्यामल तन शोभा मधुर
बालरूप सुपुनीत।
शर-धनु शोभित कर युगल
टपकत मधु-नवनीत।।
नव कोंपल सम मृदुल अंग
बरसत नैनन जोत।
कृपा दृष्टि अनवरत बह
लखत सुमंगल होत।।
चरण कंवल हरि राइ के
छुवत प्राण जीवंत।
मन निर्मल,सुख बहत नित
बरसत नेह अनंत।।
चरण युगल शोभा अमित
कमल नयन मुख चंद।
निरखत मन बौरात है।
बरसत नेह अनंद।।
सतीश चन्द्र श्रीवास्तव
रामपुर मथुरा जिला सीतापुर




