
फहर फहर फहराया तिरंगा।
उॅंचे गगन लहराया तिरंगा।।
माटी है भारत की चंदन।
करते निशदिन इसको वंदन।।
है गणतंत्र महोत्सव भारत।
करते सब मन से हैं आरत।।
मिलजुल कर सबको है रहना।
प्रेम भाव को मन में भरना।।
पर्व -गर्व से देश मनाता।
सबको खुशी गणतंत्र लाता।।
जनता गणतंत्र मनाती है।
संविधान की नीति न आती।।
संगत अच्छी जब होती है।
देश विकास तभी बोती है।
नील गगन झंडा फहराता।
तभी गणतंत्र पर्व मनाता।
डॉ उषा अग्रवाल जलकिरण
छतरपुर मध्यप्रदेश




