
बहुत कुछ समझाकर जाती है ज़िन्दगी,
हँसाकर कई बार रुला जाती है ज़िन्दगी।
जी लो पल- पल को, मुस्कुराकर दोस्तों,
थम जाएं कब साँसें,बताकर न जाती है ज़िन्दगी।
हंसाकर जब कभी रुला जाती है ज़िन्दगी,
हर मोड़ पर नई सीख सिखा जाती है ज़िन्दगी।
कल की फिक्र में आज यूं ही ना खो जाना,
पल भर में हाथों से फिसल जाती है ज़िन्दगी।
जो पास है उसी को अपना समझ लीजिए,
वक्त की आंधी सब कुछ उड़ा जाती है ज़िन्दगी।
कुछ ख्वाब अधूरे ही रह जाते हैं उम्र भर,
पूरी कहां हर आरज़ू करा पाती है ज़िन्दगी।
समेट लो रिश्ते हंसी और सुकून *दिलकश*,
कब आखरी सांस ले चली जाती है जिंदगी।
*दिनेश पाल सिंह दिलकश*
*जनपद संभल उत्तर प्रदेश*




