
ज़िन्दगी तुझको बदलना चाहता हूं।
प्यार के सांचे में ढलना चाहता हूं।
एक दुनिया मेरे भीतर भी तो है,
जिसके बाहर मैं निकालना चाहता हूं।
दूसरों का दर्द ज़ख्मी कर रहा दिल को मेरे,
दुःख भरी दुनिया बदलना चाहता हूं।
मानता हूं मैं कि मुझसे दूर रहती है बहुत,
ज़िन्दगी तेरी गोद में फिर से मचलना चाहता हूं।
प्रीति की दुनिया निगोड़ी हो गई दुश्मन,
आंख, आंसू और सपने सा संभलना चाहता हूं।
वाई.वेद प्रकाश
द्वारा विद्या रमण फाउंडेशन
शंकर नगर, मुराई बाग, डलमऊ, रायबरेली उत्तर प्रदेश 229207
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