हिंदी दिवस पर दस्तक देता आलेख विशेष
डॉ रामशंकर चंचल, झाबुआ ने सारी जिंदगी हिंदी भाषा की अद्भुत सेवा में समर्पित कर दी

देश के इतिहास में आदिवासी पिछड़े अंचल झाबुआ जैसे अंचल में आजीवन व्यतीत कर सारी जिंदगी पूरी रात जाग कर अद्भुत कृतियां भेंट करते हुए सैकड़ों सम्मान ओर अद्भुत उपलब्धि हासिल किए लाखों पाठकों द्वारा सराहा गया डॉ रामशंकर चंचल ने अपनी नई कविता लघु कथाओं और उपन्यास आलेख आदि आदि सैकड़ों कृतियों के साथ विश्व पटल पर दस्तक दे देश को सैकड़ों कृतियों देने के साथ साथ यूं ट्यूब चैनल सैकड़ों कविता और कथाएं अपने ही स्वर में उम्दा प्रस्तुति के साथ विश्व पटल पर लाखों चाहने वालों को हिंदी भाषा से जोड़ा है वहीं सैकड़ों युवा पीढ़ी को प्रेरित कर साहित्य सेवा सृजन को जन्म दिया है गर्व महसूस होता हैं वंदनीय हैं डॉ रामशंकर चंचल की अद्भुत साहित्य साधना और तपस्या जो सदियों जिंदा रहेगा और आनेवाले समय को साहित्य जगत में जोड़े हुए प्रेरणा स्रोत है
सचमुच अद्भुत ईश्वरीय उपहार है और उनकी अथक परिश्रम और साधना है कि आज झाबुआ आदिवासी पिछड़े अंचल में रहते हुए देश और दुनिया को चौका दिया है अपने अथक परिश्रम आत्मा विश्वास जुनून से हिंदी भाषा और साहित्य साधना को तपस्या मान कर सतत् कर्म पथ पर दस्तक दे
झाबुआ ही नहीं आज सारे देश और विश्व में चर्चित एक ऐसा इतिहास रचा है जो सदियों सम्मान से नवाजा जायेगा इसमें कोई दो मत नहीं है आज के समय जब मानवीयता हाशिए पर दस्तक दे रही हैं डॉ रामशंकर चंचल ने अपनी अद्भुत बेहद सार्थक सृजन उपलब्धि से सभी लोगों को देश और विश्व पटल के बिना कोई धर्म राजनीति जाति धर्म समाज ऊंच नीच जैसे सैकड़ो बैराग आलाप रही दुनिया से दूर रहे भीड़ से कोसों दूर अपनी उपस्थिति दर्ज करने के साथ साथ सभी को अपना मित्र बनाते हुए एक अद्भुत मानवीय सोच और चिंतन का सुखद
संदेश दिया है गर्व है झाबुआ मध्य प्रदेश को देश और विश्व को अपने सम्माननीय आदरणीय डॉ रामशंकर चंचल की अद्भुत साहित्य के साथ उनके मानवीय सोच और चिंतन पर सादगी और सहज सरल छवि पर धन्य धरा झाबुआ धन्य धरा भारत जहां आज भी मानव मात्र पशु पक्षी सभी प्राणियों को प्यार करते हुए लोग साहित्य साधना और तपस्या कर रहे हैं, वंदनीय है परम् आदरणीय डॉ रामशंकर चंचल जी इस पावन पवित्र कर्म पथ पर दस्तक दे आज सम्पूर्ण विश्व चर्चित हो चर्चा बन गए है डॉ रामशंकर चंचल हिंदी भाषा की अद्भुत मिसाल है उनकी अथक मेहनत और परिश्रम जो सचमुच हिंदी भाषा को सतत् बढ़ावा देने के साथ साथ विश्व पटल को सतत् सालों से साहित्य से सरोबोर कर रखा है परम् आदरणीय चंचल जी ने



