साहित्य

इश्क़

राजीव त्रिपाठी

माना कि मेरे दिल पर तुम्हारा हक़ है
मगर इस कदर रूठ जाना ना-हक़ है!!
मुश्किलें हर इंसान पर आती है
तुम्हारा रूठना भी हमसे एक इबादत है!!
कभी तुम्हारे हाथ उठे थे दुआओं में
आज क्यों उन्हीं हाथों में छाले है!!
इश्क़ इबादत का दूसरा नाम है
वादा तोड़ना तो दुश्मनों की शरारत है!!
जब से जुड़ा है तेरा नाम मेरे नाम से
लोग कहते हैं कि इश्क़ एक अदावत है!!
सहन करना ज़िन्दगी को यूंँ भी मुश्किल है
एक घर है मगर जाने की ना-इजाज़त है!!
बड़ी मुश्किल से संभाला होगा दिल को
वर्ना हमें तो मुश्किलों में रहने की आदत है!!
इश्क़ में रुसवा यूंँ ना हो कोई
जानते हैं तुम्हारे दिल को बड़ी शिकायत है!!
हम तो हालात के मारे हुए हैं
हमसे यूँ रूठ जाना तुम्हारी पुरानी आदत है!!
इश्क़ हो सच्चा तो ही निभाओ हमसे
हमें भी घर से निकलने की कम आदत है…

राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान

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