
दर्द में डूबा हुआ हूंँ मुझको
उबार ले कोई!!
किस्मत के हैं खेल निराले
जीवन मिथ्या दान कोई!!
कहने भर से नहीं मिलता है
जीवन में बड़ा ही कष्ट है!!
ग़म के बदले ग़म ही मिलते
खुशियांँ ना दे उधार कोई!!
जीवन आडंबर लगता है
मौत का आगाज़ कोई!!
व्यर्थ समय गँवा बैठे है
करना है अब काम कोई!!
संग रहेंगे जीवन में
खुशियांँ हो या ग़म कोई!!
दुनिया रैन बसेरा है और
काँटो सा लगता है ताज़!!
विषम परिस्थिति में उबरे जो
लगता वही इंसान कोई!!
कितना कह ले यह तो तय है
जीवन है उपकार कोई!!
बाकी मोह माया है जीवन
व्यर्थ का शिष्टाचार कोई!!
– राजीव त्रिपाठी
उदयपुर राजस्थान



