
दिल में अरमा हुआ चलो कुछ बोलते हैं,
अपने दिल के राज ए मोहब्बत खोलते हैं।
पहली मुलाकात में वे मुस्कुरा कर बोलते हैं,
सनम दिन रात तुम्हें मन ही मन सोचते हैं।
ओ मेरे साथ है अब जह्नो दिल में रंगते हैं,
बदली है जिंदगी जब से उसकी संगते हैं।
मज़े में खूब हम एक साथ रहा करते हैं,
जह्नो दिल में बसे वे प्यार किया करते हैं।
अक्सर जब हम खामोश हुआ करते हैं,
हर खुशी हर गम वे साथ हुआ करते हैं।
ओ अपनी ख़ुशी के पन्ने से मुझको जोड़ते हैं,
बिताये संघ दिन के राज कुछ ऐसे बोलते हैं।
दिल में अरमा हुआ चलो कुछ बोलते हैं,
अपने दिल के राज ए मोहब्बत खोलते हैं।
साहित्यकार एवं लेखक –
डॉ. आशीष मिश्र उर्वर
कादीपुर, सुल्तानपुर उ.प्र.
मो. 9043669462




