
जिसकी जैसी रहे भावना
वैसा ही बन जाता है,
खुशमिजाज इंसान हमेशा
हंसकर जीवन जीता है।
जिसके हिस्से दुख आता है
जीवन भर पछताता हैं,
एकल करता वास हमेशा
जीवन से घबराता है।
जिसके मन में राम बसे वह
पूज शिला भी आता है,
पाप बसा हो मन में जिसके
राम कहाँ वह पाता है।
राह सत्य की जो अपनाते
कुल का नाम बढ़ाते हैं
झूठ फरेबी जो बन जाते
इज्ज़त कहाँ वे पाते हैं।
डॉ.पुष्पा सिंह




