
सरस्वती माँ की पूजा का,पावन पर्व वसंत पंचमी।
वैदिक धर्म संस्कृति का,पुन्य पर्व है वसंत पंचमी।।
सनातन हिन्दू धर्म में यह,पवित्र पर्व वसंत पंचमी।
पावन विद्या का विद्या माँ का,पावन पर्व पंचमी।।
हे! विद्या माँ सरस्वती,”तमसो मा ज्योतिर्गमय”।
हे! वीणा धारणी माँ,करें तिमिर ये ज्योतिर्गमय।।
इस दिन संगम नगरी में,करते हैं पावन गंगा स्नान।
महाकुंभ भी है इस बार,करिए अमृत गंगा स्नान।।
पूजन हवन आरती,संग गा विद्या माँ का गुणगान।
सरस्वती माँ की पूजा करें,सभी शिक्षण संस्थान।।
हे! विद्या माँ सरस्वती,”तमसो मा ज्योतिर्गमय”।
हे! वीणा धारणी माँ,करें तिमिर ये ज्योतिर्गमय।।
माँ ज्ञानेश्वरी ज्ञानदायिनी,ज्ञान दे अंधकार दूर करें।
ज्ञान ज्योति से विद्या मैया,मानव जीवन पूर करें।।
अच्छे कर्म करें जीवन में,हो सके तो उपकार करें।
भरसक कोशिश कर,लोगों का भी कल्याण करें।।
हे! विद्या माँ सरस्वती,”तमसो मा ज्योतिर्गमय”।
हे! वीणा धारणी माँ,करें तिमिर ये ज्योतिर्गमय।।
सूर्य निकलते मिले धूप ये,कली फूल खिल जाएँ।
ऋतु वसंत आने से,खुश हों दो दिल मिल जाएँ।।
होने वाला है जल्दी,ऋतुराज वसंत का आगमन।
प्रकृति करेगी सुंदर छटा से,वसंत का स्वागतम।।
हे! विद्या माँ सरस्वती,”तमसो मा ज्योतिर्गमय”।
हे! वीणा धारणी माँ,करें तिमिर ये ज्योतिर्गमय।।
ऋतुराज वसंत को देख,सभी मन में खुशी छाई।
डाली पर देखो यह कलियाँ,झूमी और मुस्काई।।
आई भाई आई देखो,सुहावन ऋतु वासंती आई।
प्रेम प्यार के सुखद प्रिय,मौसम ने ली अंगड़ाई।।
हे! विद्या माँ सरस्वती,”तमसो मा ज्योतिर्गमय”।
हे! वीणा धारणी माँ,करें तिमिर ये ज्योतिर्गमय।।
प्रकृति प्रिय है पीत वस्त्र सुंदर,वसंत पंचमी का।
स्वागत वंदन अभिनंदन है,वीणा पाणी माँ का।।
पावन वसंत पंचमी पर्व की,शुभकामनाएं भाई।
सरस्वती मैया के पूजा की,ढ़ेरों हार्दिक बधाई।।
हे!विद्या माँ सरस्वती,”तमसो मा ज्योतिर्गमय”।
हे!वीणा धारणी माँ,करें तिमिर ये ज्योतिर्गमय।।
ज्ञान विभूषण डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव*
सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी.कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.




