
महिमा है निराली मैया कैसे करूं गुणगान ,
विद्या की तूं अधिष्ठात्री,मां सरस्वती तुम्हें प्रणाम।
सरस्वती मां सज रहीं पहन श्वेत परिधान,
वीणा पुस्तक धारिणी मां देना मुझको ज्ञान।
इस अंधकारमय जीवन को, तमसो मां ज्योतिर्गमय कर दे,
कंठ विराजो आकर मइया वंदन मेरी स्वीकार कर ले।
बसंत पंचमी माघ मास जन्म ली मां शारदे,
ज्ञान विज्ञान बुद्धि विद्या का वर दी मां शारदे।
प्रवाहित की ऊर्जा जल में, थल में, धरा में गगन में,
रची सुर संगीत की लहरी,मां वीणावादिनी जग में।
दूर करो मन का विषाद स्वर मधुर निर्मल बुद्धि दो,
वीणा से झंकृत हो मन, हे वीणावादिनी प्रबुद्ध कर दो।
हे कमलनयना, हे कमलासना हम पूजते हैं मन से,
मन से लोभ मिटा दे मैया , तू पाप मिटा दे जग से।
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ममता झा मेधा
डालटेनगंज




