साहित्य

लोहड़ी का त्यौहार

पंडित मुल्क राज "आकाश"

आ गई खुशियां लेकर लोहड़ी आ गई जी ।
देश में खुशी की लहर लोहड़ी आ गई जी।

मूंगफली और तिलसकरी का।
मक्के की स्वादिष्ट फुल्लीयो का।
आज बटेगा प्रसाद लोहड़ी आ गई जी।

जाती रितु और आती फसल का।
साथ मकर संक्रांति त्योहार खुशी का।
बनेंगे सभी त्योहार लोहड़ी आ गई जी।

बीचआंगन में अग्नि अलाव जलेगा।
भांगड़ा और ढोल का ताल बजेगा
साग मक्के की रोटी और मक्खन व्यंजन बनेगा
और होगी पार्टी अपार लोहड़ी आ गई।

विविध त्योहारों का देश है मेरा।
सबका सांझा नहीं तेरा मेरा।

पंजाब नहीं यह पूरे देश का।
है पावन त्यौहार लोहड़ी आ गई।

पंडित मुल्क राज “आकाश”
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश

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