
मां, पुण्यतिथि,,,,
मां तेरी यादों को समेटे
जिंदा हूं और तेरे साथ
सदा ही महसूस करता हूं
जानता हूं मां
मां, मां होती है
फिर वो कहीं भी हो
सदा साथ होती हैं
बच्चों के लिए
मां ही तुम है
किसी ईश्वर का रूप
मां ही तो है
जिसे उसके हर सुख सुकून
का ख्याल रखना पड़ता हैं
इसकी खुशी और उन्नति
सब कुछ के लिए
मां ही तो है जो सदियों से
ईश्वर से प्रार्थना करते हुए
हासिल कर लेती है
सब कुछ जानता हूं
मां फिर भी
कब तक इस अहसास को लिए
सुख सुकून महसूस करूं कि
तुम, हां तुम
यहीं हो मेरे पास, साथ
अहसास तो, अहसास है न
आज जब मां तेरे आशीष से
मैने सारी जिंदगी
लगा दी कुछ अच्छा करते हुए
जीने में ताकि तुम्हें
अच्छा लगे कि
तेरा रामू आज
बहुत बहुत कुछ कर गया और
देश दुनिया में सदियों जिंदा रहे
तेरा रामू यह सुखद सार्थक कर्म पथ पर दस्तक देता जी गया
इस अद्भुत ईश्वरीय तेरे आशीष को
भला में जानता हूं तुम थी मेरे साथ
सदा की तरह और में
यह सब कुछ कर गया
फिर भी मां
सच यह है कि
जब भी कोई बहुत बड़ी उपलब्धि लिए होता हूं
सचमुच बहुत अकेला ही
जाती हूं
क्यों कि दुनियां में
तुझ से ज्यादा कौन भला
मेरी बहुत बड़ी उपलब्धि पर
खुश होगा सिवा तेरे और पिता के
यह अहसास मेरा पीछा नहीं छोड़ता
बल्कि देखता हूं, मां
सचमुच उस समय अकेला हो
जाता हूं
सारी दुनिया इतनी खामोश हो जाति है
जैसे मैने उसका कुछ छीन लिया
सच कहूं मां
मुझे आज तक किसी भी
अपने ने मेरी बड़ी से बड़ी उपलब्धि पर बधाई जैसे तीन शब्द मुखर नहीं किया और तो और मां
उनके चेहरे इतने उस समय
अनजाने से लगते है
जैसे वो अपने नहीं थे ही नहीं
हम उन्हें अपना समझ रहे थे
खैर मैं कितना कुछ लिखूं
कम होगा तेरी कमी से ज्यादा
दुनियां में किसी को
और क्या होगी
और वह कमी में
हर समय, हर पल
महसूस करता हूं
मां और यही वजह है कि आज
तुम नहीं हो , पिता नहीं है
और तुमने मेरे ख्याल के लिए
दी थी देवत्व पत्नी नहीं है
अब बताओ मां
तुम ही बताओं
कैसा हूं मैं
तुम से ज्यादा मेरी पीड़ा
भला कौन जान सकता
इस समय कि
सब कुछ अथाह
मान सम्मान और उपलब्धि के
बावजूद कितना अकेला
होता हैं की भी
जिसकी खुशी में
उसकी खुशी से ज्यादा
खुश होने वाला
उसके पास, साथ न हो
खैर मां
सदा का तरह तेरा
अहसास लिए हूं कि तुम हो
मेरे पास,साथ
जीना है मां
क्यों कि
मर नहीं सकते हैं
प्रणाम मां
सत् सत् प्रणाम
बस यह अहसास भी जिंदा रहे
बहुत है शेष जीवन के लिए
डॉ रामशंकर चंचल
झाबुआ मध्य प्रदेश




