साहित्य

मेरे एहसास

तृषा सिंह

स्मृति में बसा प्यार
स्मृतियों की पगडंडी पर
जब तेरा नाम उभर आता है,
बीते लम्हों की खुशबू से
आज भी मन महक जाता है।
वो हँसी, वो बातें छोटी-छोटी,
हर पल अब भी पास खड़ी हैं,
समय भले आगे बढ़ गया हो,
यादें आज भी वहीं जड़ी हैं।
प्यार कभी जाता नहीं है,
बस रूप बदल कर रहता है,
दिल से निकल कर स्मृति में
धीरे-धीरे गहराता है।
तू सामने न सही आज मगर,
तेरा एहसास साथ चलता है,
स्मृति में बसा वो सच्चा प्यार
हर दर्द को चुपचाप हरता हैं।
तृषा सिंह
देवघर झारखंड

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