
सूर्यदेव की जय
जयकार मकर मकर-
संक्रांति का त्यौहार।
घर- घर मे पकवान बने,
तिल- गुड़ कद लड्डू खाए,
रिश्तों मे मिठास बुलाए।
गंगा जी मे डुबकी लगाई,
पाप-ताप सब दूर भगाई।
सूर्यदेव को जल चढ़ाई।
रंग-बिरंगी पतंगे उडी,
आसमान मे खूब सजी,
एक -दूसरे की खूब कटी।
खुशियों की बहार आई,
मकर- संक्रांति आई,
सब मिलकर खिचड़ी खाई।
दान दया और समरस्ता
का ये पर्व,
ठंडी हवा का आवरण।
मूंगफली और काजू
कतरी गर्मागर्म खिचड़ी घी,
पापड़ और तिल ।
सूर्यदेव आज हुए
उतरायण
ऋतु परिवर्तन का आनंद
आये।
ये पर्व है प्रकृति का
फ़सल और उल्लास का
खुशियों की सौगात का।
आओ मिलजर बनाएं
जीवन को खुशहाल बनाएं
नए साल का ये त्योहार मनाएं।
संगीता वर्मा
कानपुर उत्तर प्रदेश




