साहित्य

शहीद जोरावर सिंह-फतेह सिंह को शत-शत नमन

ज्ञान विभूषण डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव

राष्ट्रीय बाल बलिदान दिवस घोषित हो

पुण्य धरा भारत में जन्में हैं,गुरु गोविंद सिंह साहब।
सिखों के दशम गुरु हैं,श्री गुरु गोविंद सिंह साहब।।

चार साहिबजादों के पिताश्री,रहे हैं गुरुगोविंद सिंह।
अजीत सिंह जुझार सिंह,जोरावर सिंह फतेहसिंह।।

1704ई.में मुगल सेना चीरते,हुए चमकौर गढ़ी गए।
सरसा नदी पार करते समय,परिवार है बिछुड़ गए।।

बड़े पुत्र दो अजीत सिंह,जुझार सिंह गुरु साथ गए।
जोरावर सिंह फतेह सिंह,माता गुजरी के संग गए।।

सिखों एवं मुगलों के बीच,चमकौर युद्ध में है मारा।
मुगलों ने धोखा देकर के,अजीत जुझार को मारा।।

माता गुजरी संग केवल,यह दो साहिबजादे ही थे।
कोई सैनिक और सिपाही,ये उनके साथ नहीं थे।।

किसी समय गुरु महल में,रसोइयाँ गंगू रहता था।
मिल अचानक रस्ते में,मेरे घर चलिए कहता था।।

वह कहता मेरे साथ चलो,बिछड़ों से मिलाऊँगा।
मन में उसके चाल रही, वजीर से इनाम पाउँगा।।

माता गुजरी बच्चों संग,गंगू के घर को चल पड़ी।
उसने भी धोखा दिया,आई दुःख की बड़ी घड़ी।।

गंगू वजीर से मिल बताया,गोविंद की माँ मेरे घर।
संग में उनके पोते,जोरावर व फतेह भी मेरे घर।।

इंसानियत के दुश्मन गंगू,के मन में लालच लाया।
वजीर खाँ से स्वर्ण सिक्के,बदले में गंगू है पाया।।

गिरफ्तार किए तीनों को,आके वजीर के सैनिक।
ठंडे बुर्ज में लाकर इनको,रख दिए हैं ये सैनिक।।

ठिठुरती ठंड से बचने को,कोई कपड़ा नहीं दिए।
ऐसे अत्यचार गुजरी,साहिबजादों पर गए किए।।

प्रातः साहबजादों को,वजीर के समक्ष पेश किए।
सभा में इन्हें इस्लाम धर्म,कबूलने को कह दिए।।

बिना हिचकिचाहट दोनों,साहबजादों ने है बोला।
‘जो बोले सो निहाल-सत श्री अकाल’ है बोला।।

जोरावरसिंह फतेहसिंह,से सर झुकाने को कहा।
बच्चों ने वह नहीं किया,जो मुगलों ने इन्हें कहा।।

दोनों सिर ऊँचा कर के,वजीर खाँ से ये कहते हैं।
हम अकाल पुरुष-गुरु पितु के समक्ष झुकते हैं।।

ऐसा कर के हम दादा की,कुर्बानी न व्यर्थ करेंगे।
वे झुके न हैं धर्म के नाम,सर भले कलम करेंगे।।

हम स्वधर्म छोड़ कभी,ये इस्लाम कबूल न करेंगे।
हम वीर बच्चे हैं,सर कलम कराना पसंद करेंगे।।

वजीर गुस्से में आ उनको,चुनवा दिया है दीवाल।
गर्दन तक चुनवाए उन्हें,सर भी दिए हैं निकाल।।

गुरु गोविंदसिंह के दोनों,छोटे साहिबजादे शहीद।
बड़े वीरता से अपने धर्म,इरादे पर अटल शहीद।।

26 दिसंबर 1705 में धर्म पर,दोनों हुए हैं शहीद।
शौर्य-साहस के इतिहास में इससे बड़े न शहीद।।

शत-शत नमन बालवीर,अमर शहीदों का दिवस।
घोषित हो ये 26दिसंबर,बाल वीर शहीद दिवस।।

ज्ञान विभूषण डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
सेवानिवृत वरिष्ठ प्रवक्ता-पी.बी.कालेज,प्रतापगढ़,उ.प्र.
इंटरनेशनल ज्वाइंट ट्रेजरर-2023-24
(एलायंस क्लब्स इंटरनेशनल कोलकाता,पश्चिम बंगाल-भारत)
राष्ट्रीय अध्यक्ष बौद्धिक प्रकोष्ठ एवं पूर्व प्रदेश मुख्य महासचिव-उ.प्र.
मानवाधिकार सहायता संघ भारत अंतर्राष्ट्रीय

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