साहित्य

नया साल

महेजबीन मेहमूद राजानी

नया साल यूं आया है जैसे कोई दुआ उतर जाए
थोडी सी महक बिखेरे थकन की गिरहें खोल जाए.
सफर कहीं रुक जाए तो मुस्कुराहट साथ रहे,
थोड़े गम भी आए पर हिम्मत की बात रहे
हर सुबह कोई छोटी सी खुशी खिड़की पर आए,
और रातों में दुआओं की चुप गरमाहट तैरती रहे.
हम अपने सभी रिश्तों को थोड़ा वक्त दे दें
हर दिल में छिपे जख्मों को थोड़ा मरहम दे दें
नया साल किसी भी रंजिश को पिघलाना चाहे
बस हम भी अपनी आखों में थोड़ी मोहब्बत ले लें.
नया साल यूं कहे सपनों का रास्ता मत छोड़ो,
तन्हाई में भी अपने दिल की लौ को हमेशा जोड़ो
चलो इस साल हम दुनिया में थोड़ा चैन बढ़ाए
और अपने कदमों के संग, आपस मे मिल जाए.

महेजबीन मेहमूद राजानी
सड़क अर्जुनी
9423415191

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