साहित्य

पर्यावरण के लिए संघर्ष

संगीता वर्मा

हरे पेड़ जो एक तुम काटे
हत्या करके जुल्म ही बाटें !
लाखों पेड़ जो रोज है कटते
सौंदर्य वन का ऐसे घटते!
पर्यावरण को आप बचाओ
हर कोई एक पेड़ लगाओ!
जल पवन वन उपवन सोना
मंहगा कितना इसको खोना!
आओ अब इतिहास को देखे
इस सुन्दर मधुमास को देखे!
हम सब काहे भटक गये है
करना क्या प्रयास को देखे!
मौसम का बदला मिजाज को देखे
टूटता हिंगिरी का ताज़ को देखे!
धू -धू कर सूरज हैं जलता
जल-स्तर हुआ मोहताज हैं !
चिंतन इसकी बहुत जरूरी
यह समझो इसकी मजबूरी!
पर्यावरण और यह प्रदूषण
मन से समझे इसकी पूरी !
कुछ तो आपना फर्ज निभाओ
अपने जन्म का कर्ज तो निभाओ!
प्रकति छटा को नष्ट न करना
धर्म को अपने भ्रष्ट‌ न करना..!!

संगीता वर्मा ‘
कानपुर उत्तर प्रदेश

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